Friday, 16 March 2018

Habits

Habits tell the identity of  Yours ...



A  Stranger in the court of a king came to ask for a job.



He was asked about his credentials,

So he said,

"I am a man, I can see the animal, look at it and tell about it.

The King made it his "in charge of the horse stables".

After a few days, the king asked him about his most expensive and favorite horse,

She said, "Not a racial."



The king was surprised, he called the horse from the forest and asked.

He said that the horse is a racial, but on the birth of his mother, his mother had died, he was drinking with a cow's milk and grew up with him.

The king summoned his servant and asked how did you know that the horse is not a racial? "



"She said," when they eat grass, then down the head like cows, while the racial horse grows in the face in the mouth. "



The king was very pleased with his capacity, he sent the prize to the servant's house as a grain, ghee, poultry and eggs.



And stationed him in the Queen's palace.

After a few days, the king asked for her opinion about the queen, she said, "Modalities are like queens but are not born."



The land went under the feet of the king, he called his mother-in-law, the matter told him, Saas said, "It is true that your father had asked for my relation only on our daughter's birth, but our daughter in 6 months He had died, so we made someone else's daughter our daughter to keep close to your state. "



The king again asked his servant "How did you come to know?"



"She said," Rani Sahiba's servants are worse than those with scandal. A noble person has a way of dealing with others, which is not at all in Rani Sahib.



The king was pleased with his connoisseur sight, and many grains, sheep and goats were rewarded as well, and he deployed him in his court.



Some time passed, the king again called the servant, and asked about himself.



The servant said, "If I have good life, then tell me."



King promised.



He said, "You are neither the king's son nor your followers are kings."



The king was very angry, but had given the promise of the good of life, the king straightway reached his mother's palace.



Mother said,

"It is true that you are the son of a cowboy, we did not have children, so we took you with adoption."



The king summoned the servant and asked, "How did you know?"



He said, "When the King gives a reward", then the diamonds give in the form of pearls and gems .... But you give the sheep, goats, food and drink ... This attitude is not of any kings, Only a shepherd's son can be. "



Any person has so much wealth, happiness, prosperity, ritabah, elm and musical, all these are exterior displays.

Humanity is identified by its behavior and its determination ...



That is why thinking of selling "tea" can not rise above the sale of "pakodas".

The status changes, but do not think.




(Forwarded as received)

21 लोगो को भेजे,


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जिससे आपके खाते में 15 लाख आ जाएगा,

एक व्यक्ति ने कुछ साल पहले ही भेजा था 

नीरज मोदी,

 ललित मोदी,  
सुशिल मोदी 
अवं 
विजय माल्या 

ने  21 लोगो को भेजे, 

जिससे उसकी ₹11k r. तक मिले, 

राम रहीम, 
श्री आशा राम जी बापू जी, 
रामपाल 
एंड 

एक बाबा ने मैसेज पढ़कर नहीं भेजा तो 


उसके 50 टन चंदन की लकड़ी पकड़ी गई!




http://golgpppa.blogspot.in/2018/03/habits.html आदतें औकात का पता बता देती हैं...

एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया।

उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, 
तो वो बोला, 
"मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ।
राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। 
चंद दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, 
उसने कहा, "नस्ली नही  हैं ।"

राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा..
उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है। 
राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं ?" 

"उसने कहा "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता हैं।😊

राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज ,घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। 

और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। 
चंद दिनो बाद , राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा, "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।”

राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं,  कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।"

राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?"

""उसने कहा, " रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा हैं । एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही।

राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया। 

कुछ वक्त गुज़रा, राजा ने फिर नौकर को बुलाया,और अपने बारे में पूछा।

नौकर ने कहा "जान की सलामती हो तो कहूँ।”

राजा ने वादा किया।

उसने कहा, "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।"

राजा को बहुत गुस्सा आया, मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा।

मां ने कहा, 
"ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे गोद लेकर हम ने पाला।”

राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , बता, "तुझे कैसे पता चला ?”

उसने कहा " जब राजा किसी को "इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं....लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं...ये रवैया किसी राजाओं का नही,  किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।"

किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा हैं । 
इंसान की असलियत की पहचानउसके व्यवहार और उसकी नियत से होती हैं...

इसीलिए  “चाय” बेचने वाले की सोच, “पकौड़े” बेचने से ऊपर नही उठ सकती।
हैसियत बदल जाती है,पर सोच नही।

(Forwarded as received)

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