Thursday, 22 March 2018

Yaaden

परेल ....फक्त परेल..... 

"वो बारिश की शाम,
वो " परेल " का जाम,
वो " परेल व्हिलेज" की हवा,
वो " के ई एम " की दवा,
वो " सोमवार बाजार" की शाॅपींग,
वो " कामगार  " की पाव-भाजी,
वो " मिनाक्षी " का वडा-पाव,
वो "माॅन्जिनीस" का केक,
वो " गौरीशंकर " का श्रीखंड,
वो " नरेपार्क " का गोला,
वो " श्रीजी " की कचोरी,
वो " सिद्ध स्नॅक्स " का समोसा,
वो " सदानंद " की मिसळ,
वो " दामोदर " के नाटक,
वो "एम डी काॅलेज" की मीठी-यादें,
वो "दोस्तों" का कमीनापन,
वो " परेल " की सडके,जहा "सबका दिल" धडके,
वो मस्ती की बाते,ऐसी है कुछ हमारे "परेल " की "यादे"
"परळकर" होण्यात आहे जी मजा, ती दुस-या कशातच नाही रे मित्रा।















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